Tuesday, September 25, 2018
Home > कविता

कवि गोपीनाथ “चर्चित” की कुछ रचनाएँ

गंगापुर सिटी के राष्ट्रीय कवि महबूबा मुफ्ती सांप सगा होता नहीं , कर यारी पछताय पिये दूध विष उगलती , मेहहूबा कहलाय महबूबा कहलाय , पड़ौसी को ही चाहे गठ

पूरी खबर पढ़ें

अरे बावरे

भौर सुहानी कहे कहानी सुखी रहे हर इंसानी सूरज सबका चंदा सबका बाँट न सकते हिस्सा नभ का छोड़ जायेगा तोड़ जायेगा बंधन सारे अरे बावरे… जो खेता है बिन पानी के नाव हमारी कभी विचारी खोजा उसमें जिसमें लय सब समझेगा कब तेरा

पूरी खबर पढ़ें

पाण्डेय ‘व्यग्र’ के काव्य-संग्रह “पाण्डे जी कहिन…” का विश्व-पुस्तक मेले में विमोचन

नई दिल्ली। विश्व-पुस्तक मेला 2018 प्रगति मैदान नई दिल्ली में दिनांक 07/01/2018 को गंगापुर सिटी के कवि एवं साहित्यकार विश्वम्भर पाण्डेय 'व्यग्र' के दूसरे काव्य-संग्रह

पूरी खबर पढ़ें

एक युग बीता…..पाण्डेय ‘व्यग्र’

एक युग बीता.................. एक युग बीता एक युग आया, युग आयेंगे जायेंगे ... जो कर जाते काम सुनहरे, युग-युग गाये जायेंगे... जी कर भी जो जी ना पाये नाकामी में

पूरी खबर पढ़ें

अरे बावरे – “व्यग्र” पाण्डेय

अरे बावरे...(कविता) ********* भौर सुहानी कहे कहानी सुखी रहे हर इंसानी सूरज सबका चंदा सबका बाँट न सकते हिस्सा नभ का छोड़ जायेगा तोड़ जायेगा बंधन सारे अरे बावरे... ********** जो खेता है बिन पानी के  नाव हमारी कभी विचारी खोजा उसमें जिसमें लय सब समझेगा

पूरी खबर पढ़ें